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उसने कहा था

Wednesday, 22/07/2026 09:42 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
02
Category
Other Pub.
Language
Hindi
उसने कहा था

उसने कहा था

Category 1
Category 4
NA

उसने कहा था

चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी पर आधारित

सचित्र भारतीय साहित्य एक नवोन्मेषी साहित्यिक परियोजना है, जिसके अंतर्गत सात भारतीय भाषाओं के विख्यात उपन्यासों को सरल एवं सचित्र रूप में प्रकाशित किया जा रहा है । इसका उद्देश्य, भारतीय साहित्य की विख्यात रचनाओं और उनके लेखकों से पाठकों को परिचित कराना है। सचित्र भारतीय साहित्य की प्रत्येक पुस्तक में छह प्रसिद्ध उपन्यास होंगे, जिनमें से प्रत्येक उपन्यास के कथानक का संक्षेप सिर्फ 32 पृष्ठों में रंगबिरंगे चित्रों के साथ पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इस प्रकार पढ़ने की प्रक्रिया सरल बन जाती है और कुछ ही मिनटों में पूरी कहानी को पढ़ा और समझा जा सकता है। भारतीय साहित्य के प्रति पाठकों को उन्मुख कराना सचित्र भारतीय साहित्य का मूलमंत्र है, जिसके ज़रिए भारतीय लेखकों और उनकी विख्यात रचनाओं की ओर पाठकों को आकर्षित कराना हमारा लक्ष्य है। यह भी गौरव की बात है कि सचित्र भारतीय साहित्य, सचित्र रूप में भारतीय साहित्य को अपनाने और विश्व भर में फैलाने की दिशा में पहला और एकमात्र प्रयास है। सचित्र भारतीय साहित्य भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत को समर्पित है। प्रस्तुत चित्रकथा, चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी पर आधारित है।

उपन्यास का परिचय
उसने कहा था कहानी एक चरित्र - प्रधान कहानी है। कहानी में युध्द का चित्रण होते हुए भी इसमें एक ऐसे चरित्र (लहनासिंह) को प्रस्तुत किया गया है, जो बचपन में ही एक छोटी लड़की के आकर्षण में बंध जाता है। बाद में उसके अनुरोध की रक्षा करता है। वह अपने प्राण देकर भी उसके पति सूबेदार हज़ारासिंह एवं पुत्र बोधासिंह को बचा लेता है। बाल्यकालीन प्रेम की रक्षा के लिये अपने जीवन का बलिदान देता है। लहनासिंह के बलिदान के द्वारा उसके आदर्श प्रेम का चित्रण करना इस कहानी का उद्देश्य है। कहानी भर में कहीं प्रेम की निर्लज्जता, प्रगल्भता, वेदना की वीबत्स विकृति नहीं है। सुरुचि के सुकुमार से सुकुमार स्वरूप पर कहीं आघात नहीं पहुँचता। इसकी घटनाएँ ही बोल उठती हैं; पात्रों के बोलने की आवश्यकता नहीं। नायक के आत्मबलिदान का यह रूप देवोपम होते हुए भी मानवीय आदर्श ही इस कहानी की विशेषता है।

चंद्रधर शर्मा गुलेरी

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी गुलेरी जी का जन्म 1883 ई को जयपुर में हुआ था। बचपन में उन्होंने अपने विद्वान पिता से संस्कृत पढ़ी और पाँच-छः वर्ष की अवस्था में उन्हें तीन-चार सौ श्लोक तथा अष्टाध्यायी के दो अध्याय कंठस्थ थे। नौ-दस वर्ष की अवस्था में गुलेरी जी ने संस्कृत में एक छोटा-सा व्याख्यान देकर भारतधर्म महामण्टल के कई उपदेशकों को आश्चर्य चकित कर दिया था। बडे होकर वह दर्शन- शास्त्र में एम ए करना चाहते थे पर जयपुर राज्य के आग्रह से उन्हें खेतड़ी नरेश जयसिंह का संरक्षक बनकर अजमेर के मेयो कालेज जाना पड़ा और वह वही संस्कृत के प्रधानाध्यापक हो गए। सन् 1920 में वह अजमेर से काशी आ गए और काशी विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के अध्यक्ष हो गए पर दो वर्ष तक कार्य करने के पश्चात् सन् 1921 ई में 39 वर्ष की अल्पावस्था में उनका स्वर्गवास हो गया। यद्यपि गुलेरी जी ने बहुत कम लिखा है परन्तु उन्हें ख्याति बहुत अधिक प्राप्त हुई है और उसने कहा था नामक कहानी ने तो उन्हें अपने साहित्य में अमर कर दिया है । यों तो वह सम्पादक, निबन्धकार और कहानीकार के रूप में हमारे सामने आते हैं, परन्तु प्रसिध्दि उन्हें कहानीकार के रूप में ही अधिक प्राप्त हुई । सम्भवतः वह पहले कहानीकार हैं जिन्होंने प्रथम विश्वयुध्द को लक्ष्य कर कहानी लिखी है और उसने कहा था में महायुध्द का जो चित्र अंकित किया गया है वह आँखों देखा जान पड़ता है । उस उपदेश प्रधान युग में उन्होंने मानव मन का विश्लेषण भी किया है। उसने कहा था की सम्वेदना मूलतः कर्तव्य और प्रेम को लेकर आयी है। उनकी कहानियों के पात्र मानवीय और यथार्थ है तथा उनकी अवतरणा व्यक्ति समाज और उनकी मान्यताओं के धरातल पर हुई। इसमें सन्देह नहीं कि मानवीय चरित्रों की अवतरणा तथा उनमें सहज व्यक्तित्व की प्रतिष्ठा का सुन्दरतम उदाहरण हमें उनकी कहानियों में मिलता है। शैली विधा की दृष्टि से भी उनकी कहानियाँ पूर्ण सफल रही हैं।

 

  • इंडया कॉमिक्स
  • शीर्षक : उसने कहा था
  • अंक : 02
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक :  इंडया कॉमिक्स प्राइवेट लिमिटेड
  • प्रकाशन वर्ष : ....

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