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गोदान

Thursday, 23/07/2026 10:05 AM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
01
Category
Other Pub.
Language
Hindi
गोदान

गोदान

Category 1
Category 4
NA

गोदान

प्रेमचंद के उपन्यास पर आधारित

सचित्र भारतीय साहित्य एक नवोन्मेषी साहित्यिक परियोजना है, जिसके अंतर्गत सात भारतीय भाषाओं के विख्यात उपन्यासों को सरल एवं सचित्र रूप में प्रकाशित किया जा रहा है । इसका उद्देश्य, भारतीय साहित्य की विख्यात रचनाओं और उनके लेखकों से पाठकों को परिचित कराना है। सचित्र भारतीय साहित्य की प्रत्येक पुस्तक में छह प्रसिद्ध उपन्यास होंगे, जिनमें से प्रत्येक उपन्यास के कथानक का संक्षेप सिर्फ 32 पृष्ठों में रंगबिरंगे चित्रों के साथ पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इस प्रकार पढ़ने की प्रक्रिया सरल बन जाती है और कुछ ही मिनटों में पूरी कहानी को पढ़ा और समझा जा सकता है। भारतीय साहित्य के प्रति पाठकों को उन्मुख कराना सचित्र भारतीय साहित्य का मूलमंत्र है, जिसके ज़रिए भारतीय लेखकों और उनकी विख्यात रचनाओं की ओर पाठकों को आकर्षित कराना हमारा लक्ष्य है। यह भी गौरव की बात है कि सचित्र भारतीय साहित्य, सचित्र रूप में भारतीय साहित्य को अपनाने और विश्व भर में फैलाने की दिशा में पहला और एकमात्र प्रयास है। सचित्र भारतीय साहित्य भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत को समर्पित है।प्रस्तुत चित्रकथा, उपन्यासकार एवं कथाकार मुंशी प्रेमचंद के एक उपन्यास पर आधारित है।

उपन्यास का परिचय
गोदान' प्रेमचन्द की साहित्य यात्रा की सर्वश्रेष्ठ कृति है। 'गोदान' आज़ादी के पहले की कहानी है, लेकिन यह गहरे संस्कारों, जीवन की गहराई और जातीय परिदृश्य के कारण आज भी कालजयी है। प्रेमचन्द ने इसमें तत्कालीन सामाजिक तथा राजनीतिक समस्याओं का चित्रण किया है। यह किसानों के संघर्षमय जीवन का प्रतिबिंब है। उपन्यास के हर पात्र समाज को कुछ न कुछ संदेश देता है। आज भी हमारे समाज में ऐसे पात्र जिन्दा हैं। ' गोदान' में संघर्षमय जीवन के साथ-साथ आधुनिक भारत का एक उभरता हुआ रूप भी है। होरी गाँव का नामी किसान है। वह अपने कर्म पर ही विश्वास रखता है। अपने परिवार का मुखिया होने के कारण सारे कर्तव्यों को सही ढंग से निभाता है। किन्तु परिस्थिति के सामने उसका आदर्श व्यक्तित्व टिक नहीं पाता। गाय पालने की लालसा उसमें हमेशा बनी रहती है। एक गाय तो उधार लेकर आता है, लेकिन गाय उसके दुश्मनों का शिकार बन जाती है। उसकी गाय पालने की इच्छा अंत तक पूरी नहीं होती। ज़मींदार रायसाहब का दिखावा, गाँव के पंचों का प्रपंच और शहरीकरण के नाम पर पिसते हुए आम आदमी है। मज़बूरी में होरी एक आदर्श किसान से बेचारा मजदूर बन जाता है। एक गाय खरीदने की लालसा उसके मन में ही रह जाती है, अंत में होरी का देहांत हो जाता है लेकिन विडंबना तो यह है कि उसकी पत्नी से कहा जाता है कि गो-दान करो, यहाँ लोग संस्कार के नाम पर मरे हुए को और मारना चाहते हैं। इसी विचार के प्रति प्रेमचन्द जी करारा व्यंग्य करते है।

प्रेमचन्द का परिचय
प्रेमचन्द का जन्म वारणासी के निकट लमही नामक एक गाँव मे 31 जुलाई 1880 ई. को हुआ था। इनका वास्तविक नाम धनपतराय था। इन्होंने सन् 1898 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की और सन 1899 में किसी स्कूल में मासिक 18 रुपये वेतन पर अध्यापक नियुक्त हुए। नौकरी के साथ पढाई करते हुए सन 1919 में प्रयाग विश्वविद्यालय से बी. ए. पास किया। सन् 1920 में महात्मा गाँधी के भाषण से प्रभावित होकर इन्होंने सरकारी नौकरी छोड दी। इन्होंने हँस तथा माधुरी नामक पत्रिकाओं में संपादन का कार्य सँभाला। प्रेमचन्द की प्रारम्भिक शिक्षा उर्दू में हुई थी, इसलिये इन्होंने उर्दू भाषा के माध्यम से ही लेखन आरम्भ किया। तब वे नवाबराय के नाम से लिखते थे। कुछ समय बाद हिन्दी भाषा में मुंशी प्रेमचन्द के नाम से लिखा। इन्होंने सामाजिक यथार्थवादी उपन्यासों की रचना करके उपन्यास सम्राट के रूप में ख्याति प्राप्त की। इन्होंने 300 से अधिक कहानियों की रचना की। वैसे इन्होंने निबन्ध और नाटक भी लिखे परन्तु उपन्यास और कहानी के क्षेत्र में अधिक सफल रहे। इनके लेखन में मुहावरों का प्रचुर मात्रा में प्रयोग हुआ है । इनकी भाषा विषयानुकूल है जिसमें सहजता, सजीवता तथा प्रवाह है । गोदान, निर्मला, रंगभूमि, गबन, मंगलसूत्र आदि इनके प्रमुख उपन्यास है ।
16 जून सन् 1936 को वह बीमार पड़े, पर चिकित्सा से उन्हें कुछ भी लाभ न पहुँचा और अक्तूबर सन् 1936 के प्रातः काल उनका देहावसान हो गया।

 

  • इंडया कॉमिक्स
  • शीर्षक : गोदान
  • अंक : 01
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक :  इंडया कॉमिक्स प्राइवेट लिमिटेड
  • प्रकाशन वर्ष : ....

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