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JCK-H-042-Jeevandhar Swami

Thursday, 03/09/2026 07:37 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
42
Category
Other Pub.
Language
Hindi
JCK-H-042-Jeevandhar Swami

JCK-H-042-Jeevandhar Swami

Category 1
Category 4
NA

जीवंधर स्वामी

जीवंन्धर स्वामी की यह चित्र कथा जीवन को झंकृत करती है कि गर्भवस्था में राज्यपद, जन्म श्मसान भूमि में, बाल अवस्था श्रेष्ठीगृह, युवा अवस्था में दर-दर की ठोकरें तत् पश्चात राज्यपद प्राप्त करना। कितना कठिन संघर्ष मय जीवन। सुख - दुःख मय जीवन इन परिस्थितयों में मानव मोह वस ही तो अपनाता है। जब आत्म ज्ञान होता है तो उसे सद्ज्ञान की प्राप्ति होती है तो वह संसार को छोड़ने का प्रयत्न करता है। जीवंधर स्वामी के जीवन कि यही स्थिती रही कि पिता को मारकर काष्टांगर ने राज्य पद प्राप्त किया तथा काष्टांगर को मार कर जीवंधर ने राज्य पद प्राप्त किया तथा यह जानकर के वैराय हुआ कि छीना झपटी में जीवन व्यतीत हो जाता है के पूर्व आत्म कल्याण करूँ तथा अन्त में जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।

  • जैन चित्र कथा  
  • शीर्षक : जीवंधर स्वामी
  • संख्या: 42
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : अष्टापद तीर्थ जैन मंदिर
  • प्रथम प्रकाशित : ……

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