Welcome to Madhur Sangrah - Another essence of MADHUR BAL PUSTAKALAYA | Classic n Vintage Old Books and Comics got here new Life | Reengage with your timeless classics and modern favorites |

Madhur Sangrah - Where Paper Meets Pixel

×
If You want to read these contents or you have any complain or suggestions please write to editor.madhursangrah@gmail.com If You want to read these contents or you have any complain or suggestions please write to editor.madhursangrah@gmail.com
Translate

JCK-H-005-Jo Kare So Bhare

Friday, 11/09/2026 05:19 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
05
Category
Other Pub.
Language
Hindi
JCK-H-005-Jo Kare So Bhare

JCK-H-005-Jo Kare So Bhare

Category 1
Category 4
NA

जो करे सो भरे!

जैन चित्र कथा आपके बच्चे को जैन संस्कृति से परिचित कराती है। इस पुस्तक की कथा आचार्य सकल कीर्ति जी द्वारा लिखित संस्कृत काव्य धन्यकुमार चरित्र पर आधारित है। नई पीढ़ी को सही समझ और 'शिक्षा' देने के लिए ऐसे विचार उनके समक्ष रखना जरूरी है जिससे वे आदर्शों की ओर प्रेरित हो और जीवन का सही रास्ता उन्हें मिल सके। कहानी को पढ़ने से ज्ञात होगा कि व्यक्ति लोभ बस या अज्ञानता बस अनर्थ कर जाता है। बेटा जरा मेरे हाथ धुला देना ! क्या बात है पिताजी, आपने केवल इस थैली में से पांच रूपये ही तो निकाले हैं फिर हाथ क्यों धोते हैं ! बेटा ये धर्मादा के रुपये हैं। इसका अंशं मी यदि घर में रह गया या अपने काम में ले आये तो न जाने क्या का क्या हो जाये।
फिर भगवान के समक्ष चढ़ाया हुआ द्रव्य या दान दिया हुआ द्रव्य यदि कोई खाता है, प्रयोग करता है, उसे कितना पाप बंध होता है, क्या क्या फल भोगना पड़ता है, सर्वज्ञ देव ही जानते हैं या जानते हैं वे लोग जिन्हें भोगना पड़ा है। जो करे सो भरे यह कृति आपके हाथ में है आइये देखिये देव द्रष्य खाने का फल धनकुमार के जीव ने किस प्रकार भोगा क्या- क्या दुर्गति हुई उसकी जीवन में पैसे- पैसे को तरसा । कैसी बीती उसकी जिन्दगी, बस वैसी ही जैसी गरीब की बीतती है। और जब उसने अपने जीवन को मोड़ दिया, धर्म की ओर लक्ष्य दिया, जीवन ही बदल गया उसका। मिट्टी में भी हाथ डाला तो सोना निकला। यदि इस पुस्तक के पढ़ने से किसी एक को भी निश्चय हो गया कि यदि में बुरा करूँगा तो बुरा होगा ओर उसने बुराई से हाथ खींच लिया तो मेरा यह प्रयास सफल समझँगा ।
धार्मिक आचरण राष्ट्रीय चरित्र को उन्नति देने वाला है। तथा हमें आचरण उसके अनुरूप बनाना होगा। तभी हमारा जीवन सफल होगा। 

धर्म चन्द शास्त्री
(परम पूज्य दिगम्बर जैनाचार्य श्री धर्म सागर जी संघस्थ)

  • जैन चित्र कथा   
  • शीर्षक : जो करे सो भरे!
  • संख्या: 05
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : आचार्य धर्मश्रुत्र ग्रंथमाला
  • प्रथम प्रकाशित : 1987

Comments

Leave a Reply

Login to comment