तीन दिन में
जैन चित्रकथा आपके बच्चे को जैन संस्कृति से परिचित कराती है। इस पुस्तक की कथा संस्कृत सुकमाल चरित्र पर आधारित है। अनेक विद्वानों की राय में यह कहानी प्रतीकात्मक है। आज इस बात की जरूरत है कि दुनिया के विकसित धर्मों में हमारे लिए जो आवश्यक बातें कही गयी हैं उन्हें हम समझें और अपने जीवन में उनपर चलने की कोशिश करें। नई पीढ़ी को सही समझ और शिक्षा देने के लिए ऐसे विचार उनके समक्ष रखना जरूरी है, जिससे वे आदर्शों की तरफ प्रेरित हों और जिन्दगी का सही रास्ता उन्हें मिल सके कहानियां इस तरह रखी गयी हैं कि बच्चों को वे उपदेश नहीं जीवन से जुड़ी हुई मालूम हो और आसानी से समझ में आ जाये मुझे आशा है कि बच्चों के माता-पिता भी इन कहानियों को दिलचस्पी से पढ़ेंगें और अपने जीवन को समृद्ध करेंगे। मुझे उम्मीद है कि इस प्रयास को पसन्द किया जावेगा इस पर अमल किया जावेगा और इसका प्रचार किया जावेगा। यह प्रथम प्रकाशन 'तीन दिन में' सुधी पाठकों के हाथों सौंप रहे हैं।
धर्मचंद शास्त्री
(आचार्य धर्म सागर जी सधस्थ)
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