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DWC-H-039-Udayan Aur Vasavdatta

Saturday, 12/09/2026 04:27 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
39
Category
Other Pub.
Language
Hindi
DWC-H-039-Udayan Aur Vasavdatta

DWC-H-039-Udayan Aur Vasavdatta

उदयन और वासवदत्ता
वैर से वैर शान्त नहीं होता। शत्रु खत्म हो जाते हैं, शत्रुता पीढ़ी-दर-पीढी चलती रहती है। वैर और शत्रुता को समाप्त करने के लिए प्रेम, सद्भाव और विनम्रता की शक्ति चाहिए। उदयन और वासवदत्ता का चरित्र इसी शाश्वत सत्य को प्रकट करता है।वे कौशाम्बी नरेश शतानीक और उज्जयिनीपति चंडप्रद्योत परस्पर साढू के रिश्ते से जुड़े परन्तु फिर भी चंडप्रद्योत की राज्यलिप्सा और विषयतृष्णा के कारण दोनों में परस्पर शत्रुता हो गई और चंडप्रद्योत ने कौशाम्बी का विध्वंस करने की ठान ली। किंतु रानी मृगावती की दूरदर्शिता, समयज्ञता और शान्ति तथा प्रेम की शक्ति ने चंडप्रद्योत का हृदय बदल दिया।
उदयन के समय में पुनः चंडप्रद्योत कौशाम्बी को नष्ट करने तैयार हो गया, किंतु उदयन और वासवदत्ता ने दोनों राज्यों की इस शत्रुता को प्रेम की धारा से सदा-सदा के लिए शांत कर दिया। उदयन का चरित्र त्रिषष्टिशलाका पुरुष चरित्र में है तथा हिन्दू तथा बौद्ध कवियों ने भी इस पर काव्य, नाटक आदि की रचना की है । महाकवि भास का 'स्वप्न वासवदत्ता' नाटक भी प्रसिद्ध है
प्रस्तुत चित्रकथा में जैन ग्रंथों के अनुसार उदयन और वासवदत्ता चरित्र का चित्रण किया गया है श्रमणसंघ के वरिष्ठ संत प्रवर्तक श्री रमेश मुनि जी म. ने इसका लेखन किया है तथा संपादन किया है श्री विजय मुनि जी 'विकास' ने किया है। हम आपके आभारी हैं। - महोपाध्याय विनय सागर - श्रीचन्द सुराना "सरस'

  • दिवाकर चित्र कथा  
  • शीर्षक : उदयन और वासवदत्ता
  • संख्या: 39
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : श्री दिवाकर प्रकाशन
  • प्रथम प्रकाशित : ……

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