आगमों के प्रथम प्रवक्ता आर्य सुधर्मा
वर्तमान में श्वेताम्बर जैन परम्परा में पंचम गणधर आर्य सुधर्मा का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। वे भगवान महावीर के प्रथम पट्टधर थे तथा उनकी श्रुत-परम्परा एवं शिष्य-परम्परा के प्रथम पुरुष थे। आज हमारे पास भगवान महावीर द्वारा प्रदत्त जो ज्ञान आगम के रूप में सुरक्षित है, उसके प्रथम प्रवक्ता आर्य सुधर्मा ही हैं। उन्होंने भगवान महावीर के श्रीमुख से जो वाणी सुनी उसे सूत्र का (शास्त्र का) रूप दिया और वही वाणी उन्होंने अपने पट्ट शिष्य आर्य जम्बू स्वामी को ज्ञान रूप में प्रदान की। इसलिए आगमों के प्रथम प्रवक्ता आर्य सुधर्मा माने जाते हैं।
आज विद्यमान श्वेताम्बर आम्नायों के सभी श्रमण- श्रमणी आर्य सुधर्मा की शिष्य परम्परा के हैं। वर्तमान श्रमण परम्परा के आदि आचार्य (गुरु) आर्य सुधर्मा ही थे। इस कारण सभी श्रमण-श्रमणी गणधर सुधर्मा के शिष्य (सन्तान) कहलाते हैं। आर्य सुधर्मा भगवान महावीर के सबसे अधिक निकट रहे। उन्होंने तन-मन से पूर्ण समर्पित भाव से परमात्मा महावीर की उपासना-आराधना की और उनकी ज्ञान परम्परा तथा शिष्य-परम्परा को आगे गतिमान रखा। विद्वान् मनीषी आचार्य श्री विजय नित्यानन्द सूरीश्वर जी म. ने पंचम गणधर आर्य सुधर्मा स्वामी के सम्बन्ध में ऐतिहासिक तथ्यों के प्रकाश में उनका सुन्दर, सरस और प्रामाणिक जीवन वृत्त प्रस्तुत किया है जो रोचक भी है, शिक्षाप्रद भी और ज्ञानवर्धक भी । हम आपश्री के आभारी हैं।
-महोपाध्याय विनय सागर श्रीचन्द सुराना 'सरस'
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