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DWC-H-026-Pinjare Ka Panchhhi

Saturday, 12/09/2026 07:50 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
26
Category
Other Pub.
Language
Hindi
DWC-H-026-Pinjare Ka Panchhhi

DWC-H-026-Pinjare Ka Panchhhi

पिंजरे का पंछी
चन्द्र राजा की यह कथा जैन - साहित्य की बहुत ही प्रसिद्ध रसमय कथा है। 'चन्द राजा नो रास' नाम से एक प्रसिद्ध रास के आधार पर यहाँ इसको संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है। इस कथा के मुख्य पात्र आभापुरी का राजा चन्द्र तथा उसकी सौतेली माँ वीरमती एवं चन्द्र की दो रानियाँ गुणावली एवं प्रेमलालच्छी है। कथा रस-प्रधान और आश्चर्यकारक घटनाओं से भरी हुई है। यह तो पढ़ने से पाठक स्वयं ही जान लेंगे। इस कथा का सार मुख्य रूप से कर्मों का कटु फल बताना है। पूर्वजन्म में चन्द्र राजा के जीव ने मनोरंजन के लिए एक सुन्दर रंग-बिरंगी चिड़िया को पिंजड़े में बन्द रखा था और १६ प्रहर तक उसे तड़पा-तड़पाकर भयंकर कष्ट दिये। जिस कारण मानव होकर मुर्गे के रूप में १६ वर्ष गुजारने पड़े। वह चिड़िया मरकर वीरमती बनी जिसने अपने सौतेले पुत्र चन्द्र को मुर्गा बनाकर वैर का बदला लिया। प्रेमलालच्छी के जीव ने द्वेषवश किसी तपस्विनी साध्वी को नीचा दिखाने के लिए उस पर सहेली के हार की चोरी का झूठा कलंक लगाया और उसे बहुत कष्ट दिया। उसी कर्म के कटुफलरूप प्रेमलालच्छी पर विष कन्या होने का आरोप लगा और विवाह होकर भी १६ वर्ष तक पति वियोग सहना पड़ा। इस प्रकार यह पूरा चरित्र रोचक घटनाओं के द्वारा मनुष्य के किये हुए कर्मों का फल बताने वाला अर्थात् जैसी करनी वैसी भरनी का सिद्धान्त प्रस्तुत करता है।
चन्द्र राजा का यह सम्पूर्ण कथानक बहुत ही विस्तृत है। श्रमणसंघ के स्व. युवाचार्य श्री मधुकर मुनि जी महाराज ने 'पिंजरे का पंछी' नाम से इस कथा को अत्यन्त रोचक उपन्यास शैली में लिखा है उसी कथा के आधार पर युवाचार्य श्री मधुकर जी महाराज की आज्ञानुवर्तिनी अध्यात्मयोगिनी महासती उमरावकुंवर जी महाराज 'अर्चना' की सुशिष्या, साध्वी डॉ. सुप्रभा जी एम. ए., पी-एच. डी., ने इसे दिवाकर चित्रकथा के लिए संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत कर हमें उपकृत किया है।
        -महोपाध्याय विनयसागर        - श्रीचन्द सुराना 'सरस'

  • दिवाकर चित्र कथा   
  • शीर्षक : पिंजरे का पंछी
  • संख्या: 26
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : श्री दिवाकर प्रकाशन
  • प्रथम प्रकाशित : ……

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