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DWC-H-018-Sati Anjana Sundari

Saturday, 12/09/2026 09:12 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
18
Category
Other Pub.
Language
Hindi
DWC-H-018-Sati Anjana Sundari

DWC-H-018-Sati Anjana Sundari

सती अंजना सुन्दरी
भारतीय संस्कृति में नारी का एक श्रेष्ठ रूप रहा है सती। 'सती' अर्थात् - सत्य - शील-संयम की त्रिवेणी। क्षमा सहिष्णुता और पवित्रता की पावन गंगा। जिसके जीवन का कण-कण धर्म एवं त्याग की सुवास से महकता हो, ऐसी कमल समान पवित्र जीवन जीने वाली महान नारी को सती का गौरव प्राप्त होता है। भारतीय संस्कृति में इस प्रकार की सन्नारियों की एक पवित्र परम्परा रही है। सती अंजना सुन्दरी का नाम भी उस परम्परा की एक चमकती मणि है। परम वीर भक्त हनुमान जैसे पुत्र को जन्म देने वाली माता अंजना का जीवन घोर कष्टों को धीरता, वीरता और समतापूर्वक सहने की एक करुण कहानी है।
विद्याधर राजा महेन्द्र की लाड़ली पुत्री, सौ भाइयों की अकेली प्यारी बहन अंजना का पाणिग्रहण राजा प्रह्लाद के पराक्रमी पुत्र पवनंजयकुमार के साथ होता है। विवाह से पूर्व ही कष्टों का करुण लेख अंजना के तकदीर में लिख दिया जाता है। और विवाह होते ही पवनंजयकुमार उसे भाग्य के भरोसे मंझधार में छोड़ देते हैं। दृढ़ शीलवती साहसी अंजना इन उपेक्षाओं को धीरज से सहती है, परन्तु इसी बीच भाग्य फिर उसके साथ मजाक करता है। पवनंजयकुमार का मिलाप, फिर माता बनने का अवसर और उस स्थिति में उसे ससुरगृह और पितृगृह से कलंकिता का आरोप लगाकर जंगलों की ठोकरें खाने के लिए निकाल देना - बड़ा ही रोमांचक है यह सब! भीषण डरावने जंगलों में अंजना सखि बसन्ता के साथ घूमती है। कष्टों से भी ज्यादा झूठे कलंक की पीड़ा सताती है उसे। किन्तु फिर भी अपने भाग्य का दोष मानकर धरती माता की तरह सब कुछ सहती हुई जंगल में सिंह की गुफा में सूर्य समान तेजस्वी पुत्र हनुमान को जन्म देती है।
सती अंजना की यह कहानी करुण रस प्रधान एक अनौखी कथा है। जैन साहित्य के प्रमुख इतिहास ग्रन्थ त्रिषष्टिशलाका पुरुष चरित्र के आधार पर यहाँ इस कंथा का शब्दांकन किया है प्रखर वक्ता श्री रवीन्द्र मुनि जी ने । पाठकों को इससे अनेक प्रकार की शिक्षाएँ मिलेंगी।
            -महोपाध्याय विनयसागर               - श्रीचन्द सुराना 'सरस'

  • दिवाकर चित्र कथा   
  • शीर्षक : सती अंजना सुन्दरी
  • संख्या: 18
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : श्री दिवाकर प्रकाशन
  • प्रथम प्रकाशित : ……

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