भगवान को क्यों मानें ?
ओम् भूर्भुवः स्वः। तत्सवितर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात।
ओम् भूर्भुवः स्वः। तत्सवितर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात।
इस 'गायत्री मन्त्र' द्वारा परमात्मा की प्रार्थना व गुणगान किया गया है।
हे प्राणस्वरूप, दुःखहर्ता और सर्वव्यापक, आनन्द के देने वाले प्रभो! आप सर्वज्ञ और सकल जगत के उत्पादक हैं, हम आपके उस पूजनीयतम्, पापनाशक स्वरूप तेज
का ध्यान करते हैं. जो हमारी बुद्धियों को प्रकाशित करता है। हे पिता आपसे हमारी बुद्धि कदापि विमुख न हो । आप हमारी बुद्धियों में सदैव प्रकाशित रहें और हमारी बुद्धियों को सत्कर्मों में प्रेरित करें, ऐसी हमारी प्रार्थना है।
आर्ष साहित्य :शेखचिल्ली और लाल बुझक्कड़
आर्ष साहित्य : नक कटा चोर और मूर्ख गुरु चेले
आर्ष साहित्य : महर्षि दयानन्द सरस्वती और उनके क्रान्तिकारी शिष्य
आर्ष साहित्य :लाला लाजपत राय
Kathabharati-H-03-Sri Guruji
Kathabharati-H-02-Surya Parmal Ki Shaurya Gatha
Kathabharati-H-Dr Hedegawar
प्रगति पुरुष नरेंद्र मोदी
Leave a Reply