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ACK-H-408-Mahabharat 40-Yudhisthir Ka Rajtilak

Wednesday, 14/10/2026 08:10 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
408
Category
ACK
Language
Hindi
ACK-H-408-Mahabharat 40-Yudhisthir Ka Rajtilak

ACK-H-408-Mahabharat 40-Yudhisthir Ka Rajtilak

महाभारत 40 :युधिष्ठिर का राजतिलक
भरतवंश की माथा पर महर्षि वेदव्यास ने महाभारत ज्ञान का महाकाव्य रचा. स्वयं व्यास की आज्ञा से उनके शिष्य वैशम्पायन ने उसे सबके बीच पढ़ कर सुनाया। यह कथावाचन व्यास के पौत्र के प्रयोग राजा जनमेजय और अनेक ऋषि-मुनियों की उपस्थिति में हुआ था। ये ऋषि-मुनि जनमेजय के खर्पसच (बारह वर्षो तक चलनेवाले सर्पयज्ञ) में एकत्र हुए थे. महाभारत के अपने प्रस्तुतीकरण के पिछले खंड में इसका वर्णन था कि दुर्योधन को युद्धभूमि में घायल और असहाय पट्टे देख कर अश्वत्थामा विचलित हो उठा। एक उल्लू को असहाय पक्षियों का शिकार करते देख अश्वधामा ने पांडव शिविर पर रात के अंधेरे में हमला करने का निश्चय किया। कृतवर्मा और कृपाचार्य की सहायता से उसने तमाम सोये योद्धाओं का वध कर डाला। यह भयंकर कृत्य करके उसने भाग जाने की कोशिश की।किंतु पांडवों ने उसका पीछा किया और एक संक्षित तथापि उग्र मुठभेड़ में उसे पराजित कर दिया। इस बीच उधर हस्तिनापुर में धृतबाष्ट्र अप‌ने सौ के सौ पुत्रों के मारे जाने के समाचार से शोकसागर में डूब गये।

  • अमर चित्र कथा 
  • महाभारत-40   
  • शीर्षक : युधिष्ठिर का राजतिलक
  • संख्या: 408
  • कुल पृष्ठ : 40
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : इंडिया बुक हाउस प्रा. लि.
  • प्रथम प्रकाशित : दिसंबर 1988

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