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ACK-H-391-Mahabharat 32-Dharashayi Bheeshm

Thursday, 22/10/2026 07:13 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
391
Category
ACK
Language
Hindi
ACK-H-391-Mahabharat 32-Dharashayi Bheeshm

ACK-H-391-Mahabharat 32-Dharashayi Bheeshm

महाभारत 32 : धाराशायी भीष्म
भरतवंश की गाथा पर महर्षि वेदव्यास ने महाभारत नाम का महाकाव्य रचा। स्वयं व्यास की आज्ञा से उनके शिष्य वैशम्पायन ने उसे सबके बीच बढ़ कर सुनाया। यह कथावाचन व्यास के पौत्र के प्रपौत्र राजा जनमेजय और अनेक ऋषि-मुनियों की उपस्थिति में हुआ था। ये ऋषि-मुनि जनमेजय के सर्पसत्र (बारह वर्षों तक चलने वाले सर्पयज्ञ) में एकत्र हुए थे। महाभारत, के, हमारे द्वारा प्रस्तुत इकतीसवें खंड में इसका वर्णन था कि. इस महान युद्ध के प्रथम नौ दिनों में क्या-क्या हुआ। जो नामी व्यक्ति इन दिनों में मारे गये, वे थे- मत्स्य देश के राजा विराट के दो बेटे उत्तर और शंख तथा अर्जुन का बेटा इरावान्। नौंवें दिन के अंत में ट्र्र्यो- धन का विश्वास भीष्म के सेनापतित्व पर से उठ गया, क्योंकि उसने देख लिया कि पितामह भीष्म पांडवों पर हथियार उठाने को तैयार नहीं है। 

  • अमर चित्र कथा 
  • महाभारत- 32
  • शीर्षक : धाराशायी भीष्म
  • संख्या: 391
  • कुल पृष्ठ : 36
  • भाषा : हिंदी
  • प्रकाशक : इंडिया बुक हाउस प्रा. लि.
  • प्रथम प्रकाशित : 15 सितम्बर 1987

 

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