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Chaturang Katha-H-509-Heer Ranjha

Sunday, 29/03/2026 07:44 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
509
Category
Chaturang
Language
Hindi
Chaturang Katha-H-509-Heer Ranjha

Chaturang Katha-H-509-Heer Ranjha

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हीर-राँझा

'हीर-रांझा पंजाब की एक अमर प्रेम कथा है जिसे सैलानी फ़क़ीर् सहियों से गाते आए हैं और पीढ़ी हर पीढ़ी पंजाबियों के दिल भरमाते आए हैं। हीर के गीतों में जो आहलाह, पीड़ा और आनंद है, उसका प्रेरणा स्रोत निस्संदेह सूफ़ी मत है। और रांका के प्रणय में जो आध्यात्मिक रहस्यवाद का रंग है वह सूफ़ी परम्परा का एक अति रोचक चित्र है। सर्वाधिक लोकप्रिय हीर- कथा के लेखक थे, अठारह्नीं सही के कवि, वारिस शाह। रांझा एक सीधा-सादा, गांव का लड़का था। हिन को भैंसें चराता और चैन की बांसुरी बजाता। एक तो जवानी, दूसरे कवियों जैसा स्वभाव-एक हिन घर से निकल पड़ा इस इरादे से कि हीर को ब्याह कर लाऊंगा, हीर, जो सियाल परिवार की बड़ी रूपवती सुंदर कन्या थी; जैसे लहलहाते हुए गेहूं की फसल या जैसे ठाठें मारती हुई पंजाब की नही। घर के कामकाज और खेती बाड़ी की देख-रेख में भी वह निपुण थी। पंजाब में, आज भी, नारी के आदर्श मनमोहक रूप की तुलना हीर से ही की जाती है। रांभा हीर से कैसे मिला? और हीर उसके हिलो-दिमाग़ पर कैसे छा गई? कैसे रांका के लिए सारा संसार हीर के रूप में सिमट कर रह गया? हमने यह कहानी प्रस्तुत करने में अपने सामने वारिस शाह की रचित हीर रखी है। मगर कहीं- कहीं कही सुनी कहानियों और क़िस्सों का सहारा भी लिया है। ऐसी प्रेम कथायें हर पीढ़ी में होहराई जाती हैं और बार बार नई-नई कल्पनाएँ इन्हें नए-नए रूप देती हैं। इसी लिए हीर-रांझा की प्रेम कथा के भी उतने ही रूप होंगे जितने सैलानी फ़क़िरों ने अपने मंत्र मुग्ध श्रोताओं को सहियों से ले कर आज तक सुनाए हैं।

  • शीर्षक            : हीर-राँझा
  • अंक               : 509
  • कुल पृष्ठ         : 36
  • भाषा             : हिंदी 
  • प्रकाशक       : इंडिया बुक हाउस 
  • प्रकाशन वर्ष  : ____

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