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Chaturang Katha-H-504-Virvar

Sunday, 29/03/2026 08:19 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
504
Category
Chaturang
Language
Hindi
Chaturang Katha-H-504-Virvar

Chaturang Katha-H-504-Virvar

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NA
Category 4
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वीरवर (अनुवादित)

वेताल पंचविंशति कहानियों का एक संग्रह है जिसमें एक वेताल (लाशों में भटकने वाली आत्मा) और उज्जैनी के एक पौराणिक राजा, विक्रमादित्य की कहानी है। किसी कारणवश राजा को वेताल को बुलाना पड़ा, और वह भी पूरी तरह मौन रहकर। वेताल कहानियां सुनाने और उन कहानियों में पूछे गए सवालों के जवाब मांगने पर अड़ा रहा। बुद्धिमान विक्रमादित्य को सभी जवाब पता थे। जवाब जानते हुए, उन्हें उत्तर देना पड़ा। उत्तर देते समय उन्होंने अपने ऊपर लगे मौन को भंग कर दिया, जिससे वेताल बार-बार पास के एक पेड़ पर अपने ठिकाने पर लौट जाता था। परिणामस्वरूप, कहानियों का एक ऐसा संग्रह तैयार होता है जो न्याय, निष्पक्षता, चरित्र, अच्छाई और बुराई आदि से संबंधित प्रश्न उठाता है, जो जीवन की यात्रा में अधिकांश लोगों को परेशान करते हैं। चतुरंग कथा पहले ही आपके लिए पहली वेताल कथा - पद्मावती प्रस्तुत कर चुकी है। इस अंक में हम आपके लिए दो और कथाएँ वीरवर और मधु-मावती प्रस्तुत कर रहे हैं।

टीम मधुर संग्रह द्वारा अनुवादित, धन्यवाद! अनुवादक महोदय : - संपादक, मधुर संग्रह

 

  • शीर्षक           : वीरवर (अनुवादित)
  • अंक              : 504
  • कुल पृष्ठ         : 36
  • भाषा             : हिंदी 
  • प्रकाशक       : इंडिया बुक हाउस 
  • प्रकाशन वर्ष  : .....

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