Welcome to Madhur Sangrah - Another essence of MADHUR BAL PUSTAKALAYA | Classic n Vintage Old Books and Comics got here new Life | Reengage with your timeless classics and modern favorites |

Madhur Sangrah - Where Paper Meets Pixel

×
दिनांक 20 अप्रैल 2026 दिन सोमवार विक्रम संवत् 2083 वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया (अक्षय तृतीया) की हार्दिक शुभकामनाएं!**यह साइट अभी निर्माणाधीन है!** दिनांक 20 अप्रैल 2026 दिन सोमवार विक्रम संवत् 2083 वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया (अक्षय तृतीया) की हार्दिक शुभकामनाएं!**यह साइट अभी निर्माणाधीन है!**
Translate

ACK-H-434-Manapasand Dulha

Friday, 17/04/2026 08:56 PM
Author
Chief Editor
Volume/Serial
434
Category
ACK
Language
Hindi
ACK-H-434-Manapasand Dulha

ACK-H-434-Manapasand Dulha

अमर चित्र कथा- मनपसंद दूल्हा 

कथासरित्सागर संसार की उन प्राचीन कहानियों का संग्रह है, जो वर्तमान युग में भी उपलब्ध हैं। कश्मीर के राजा अनंत की पत्नी सूर्यवती के मन-बहलाव के लिए इसका संकलन सोमदेव नामक ब्राह्मण ने किया था। सोमदेव राजा अनंत के दरबार में कवि थे। मोहक और  चित्ताकर्षक कथासरित्सागर में आश्चर्यजनक कुमारियों तथा उनके निर्भीक प्रेमियों की, राजाओं और उनके राज्यों की, शासन-कला और षड्यंत्रों की, मंत्र-तंत्र, छल-कपट और दांव-पेचों की, भूतप्रेतों और पिशाचों की कहानियां पायी जाती हैं। इस अंक में प्रकाशित 'मनपसंद दूल्हा' और 'देवताओं की गवाही' सोमदेव कृत कथासरित्सागर की कहानियों पर आधारित हैं। 


पहली कहानी मनपसंद दूल्हा, में अयोध्या के राजा वीरकेतु की कहानी बतलायी गयी है। उनके राज्य की प्रजा बहुत सुखी थी। उसी नगर में रत्नदत्त नाम का एक अमीर व्यापारी रहता था, जिसकी रत्नावती नाम की एक बहुत सुंदर बेटी थी। रत्नावती को शादी में कोई दिलचस्पी नहीं थी, और वह किसी भी राजकुमार से विवाह करने के लिए तैयार नहीं थी। उन्हीं दिनों उस नगर में चोरियों का सिलसिला बढ़ गया। राजा वीरकेतु ने चोरों को पकड़ने के लिए खुद भेष बदला और रात के अंधेरे में निकल पड़े। आगे क्या हुआ वो इस पुस्तक में पढ़ें। 

इस कॉमिक्स की दूसरी कहानी देवताओं की गवाही में उपकोशा नाम की एक बहुत ही चतुर महिला की कहानी दिखाई गयी है, जिसकी सगाई वररुचि नामक युवक से हुई से हुई थी। जब वररुचि कुछ समय के लिए नगर से बाहर जा रहा था, तो उसने अपनी सारी धन-संपत्ति हिरण्यगुप्त नाम के एक लालची व्यापारी के पास रखवा दी। वररुचि की अनुपस्थिति में, नगर के तीन बड़े अधिकारी—मंत्री, खजांची और दंडाधिकारी—उपकोशा की सुंदरता पर मोहित हो गए और उसे परेशान करने लगे। इतना ही नहीं, लालची व्यापारी हिरण्यगुप्त ने भी वररुचि का धन वापस करने से मना कर दिया और उपकोशा के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। इसके बाद वररुचि का क्या हुआ? वह इस कॉमिक्स के दूसरी कहानी में पढ़ें। 

  • अमर चित्र कथा 
  • शीर्षक : मनपसंद दूल्हा
  • अंक : 434
  • कुल पृष्ठ : 36
  • लिपि : हिंदी
  • प्रकाशक :  इण्डिया बुक हाउस पब्लिकेशन 
  • प्रकाशन वर्ष : फरवरी 1991

Comments

  • Excellent work Admin, image quality has gone Four folds with the use of AI. Only issue is with AI mis reading some hindi words from real comic page fonts. I!suggest to try translating English titles to hindi with AI, may be they will be translated correctly. Or to get a script of the comic page from AI and correct manually the problem words and then ask AI to replace that back. But kudos for the effort in preserving the gems for future generations. Keep it up.

Leave a Reply

Login to comment